संस्कारों का पतन

आज हम भारतवासी एक गंभीर समस्या से गुजर रहे हैं आज की युवा पीढ़ी में अक्सर देखा जा रहा है कि उसमें संस्कारों की भारी कमी देखी गई है पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव देखने को मिल रहा है इस समस्या इतना खतरनाक प्रभाव है इसमें लड़ाई झगड़े मां-बाप का अपमान स्त्री पुरुष के झगड़े और पारिवारिक कलह है देखने को मिल रही है छोटे बड़े की लाज शर्म बिल्कुल भी नहीं रही है आपस में रिश्ते टूट रहे हैं सास बहू के झगड़े दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं मानव सभ्यता खतरेमें

 हमारे समाज में खोए हुए संस्कारों को पुनर्जीवित करने के लिए अनेक संस्थाएं एनजीओ कई समाज सुधारक हाय लेकिन उनके द्वारा चलाए गए अभियान से समाज को कोई लाभ नहीं हुआ बल्कि सरकार भी अनेक नियम कानून लागू करती है लेकिन फिर भी सही हल नहीं खोज पाए
अगर हमारे समाज को स्वच्छ बनाना है तो हमें आध्यात्मिक की ओर आना पड़ेगा और संत रामपाल जी महाराज के सत्संग सुनने पड़ेंगे यही एकमात्र उपाय है सर्व समाज संस्कारों युक्त धरती को स्वर्ग बनाने के लिए संकल्प बंद हैं संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित पुस्तक जीने की राह है बहुत ही अनमोल पुस्तक है जो व्यक्ति एक बार पढ़ लेता है वह परमात्मा से डरने वाला संस्कारों युक्त हो जाता है छोटे बड़े का मान सम्मान आदर सत्कार सेवा भाव सब मात्र पुस्तक पढ़ने सत्संग सुनने से हो जाता है इसलिए हर व्यक्ति को जीने की राह पुस्तक और ज्ञान गंगा पुस्तक पढ़नी चाहिए

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